Wednesday, June 26, 2019

रामपुर के एसपी अजयपाल शर्मा ने कथित बलात्कारी को गोली मारी?

उत्तरप्रदेश के रामपुर में छह साल की बच्ची के कथित बलात्कारी को मुठभेड़ में गोली मारने के मामले में रामपुर के पुलिस अधीक्षक अजयपाल शर्मा की चर्चा सोशल मीडिया पर ख़ूब हो रही है.
क तरफ़ तो लोग इसे उनकी बहादुरी क़रार दे रहें हैं तो दूसरी तरफ़ बहुत सारे लोग इस मामले में कई सवाल भी उठा रहे हैं, जो न सिर्फ़ पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं बल्कि राज्य की क़ानून व्यवस्था को भी घेरे में डाल रही है.
क़रीब डेढ़ महीने पहले छह साल की एक बच्ची की बेरहमी से हत्या करके शव को कहीं फेंक दिया गया था. आशंका ज़ाहिर की गई कि पहले बच्ची के साथ दुष्कर्म किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई.
इस मामले में नाज़िल नाम के जिस शख़्स को पुलिस मुख्य अभियुक्त मान रही थी, दो दिन पहले पुलिस के साथ उसकी मुठभेड़ हुई जिसमें बताया जा रहा है कि एसपी अजयपाल शर्मा ने नाज़िल को गोली मार दी जो कि उसकी टांगों पर लगी. बाद में नाज़िल को पुलिस ने हिरासत में लेकर अस्पताल भेज दिया.
लेकिन सोशल मीडिया पर अजयपाल शर्मा की तस्वीरों के साथ यही बात वायरल हो रही है कि नाज़िल को गोली अजयपाल शर्मा ने ही मारी. इसके लिए अजयपाल शर्मा की जमकर तारीफ़ भी हो रही है. गोली अजयपाल शर्मा ने ही मारी या फिर किसी और ने, इस बारे में जानने के लिए अजयपाल शर्मा से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया.
सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि पुलिस ने 'पीड़ित लड़की के परिवार को न्याय दिलाया है', 'उनके मन में थोड़ा सुकून मिला है', 'इससे बदमाशों के मन में ख़ौफ़ पैदा होगा' 'इससे अपराधों में कमी आएगी' इत्यादि. सोशल मीडिया पर तो कई लोग उन्हें भगवान के समकक्ष रख रहे हैं तो कई उन्हें सिंघम का अवतार बता रहे हैं.
लेकिन कई लोग इस पर सवाल भी उठा रहे हैं. उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक रह चुके पूर्व आईपीएस अधिकारी एके जैन कहते हैं कि यदि मुठभेड़ के दौरान अभियुक्त ने गोली चलाई और पुलिस ने आत्मरक्षा में उसे गोली मारी तो इसमें कोई ग़लत नहीं है लेकिन सिर्फ़ रेप और हत्या का अभियुक्त मानकर गोली मार दी तो ये बिल्कुल ग़लत है.
बीबीसी से बातचीत में एके जैन का कहना था, "जैसा मैंने ख़बरों में पढ़ा है कि उस व्यक्ति ने पुलिस पर उस वक़्त गोली चलाई जब पुलिस उसे गिरफ़्तार करने की कोशिश कर रही थी. ऐसे में अपने बचाव में पुलिस अधिकारी का गोली चलाना पूरी तरह से न्यायसंगत है लेकिन रेप के एक अभियुक्त पर गोली चला देना जिसका कि पहले से कोई आपराधिक इतिहास भी न रहा हो तो ये ठीक नहीं है."
एके जैन कहते हैं कि अभियुक्त की तो छोड़िए यदि आरोप साबित भी हो गए हों तो भी गोली चलाने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि सज़ा देना तो न्यायालय का काम है, पुलिस का नहीं.
वहीं पुलिस विभाग के एक मौजूदा अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर इस कार्रवाई को पूरी तरह से 'पब्लिसिटी स्टंट' क़रार देते हैं.
उनके मुताबिक़, "ये बात समझ से परे है कि एक अभियुक्त को किसी एक थाने की पुलिस पकड़ने गई है और उस पर गोली पुलिस अधीक्षक चला रहे हैं. किसी मुठभेड़ का नेतृत्व पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी का करना कोई सामान्य बात नहीं होती है और ये मामला इतना बड़ा और मुश्किल नहीं था कि इसमें एसपी जैसे अधिकारी को लगना पड़ता."
हालांकि पुलिस अधिकारी की इस कार्रवाई की प्रशंसा करने वाले सोशल मीडिया पर ही नहीं बल्कि उसके अलावा भी तमाम लोग हैं. लखनऊ में अमर उजाला के वरिष्ठ पत्रकार और पिछले क़रीब डेढ़ दशक से क्राइम की रिपोर्टिंग कर रहे विवेक त्रिपाठी कहते हैं कि एसपी अजयपाल शर्मा ने कुछ भी ग़लत नहीं किया. उनके मुताबिक़ ऐसे जघन्य कृत्य के लिए तो और बड़ी सज़ा दी जानी चाहिए थी.
विवेक त्रिपाठी कहते हैं, "पुलिस का इतना भय अपराधियों में रहना चाहिए अन्यथा अपराध रोकना आसान नहीं होगा. हम लोग क्राइम की ख़बरें कवर करते-करते अपराध और अपराधियों के मनोविज्ञान को भली-भांति समझते हैं. क़ानून और पुलिस का भय यदि ख़त्म हो गया तो अपराधियों के हौसले बुलंद रहेंगे."
उत्तर प्रदेश में डीजीपी रह चुके एक अन्य रिटायर्ड पुलिस अधिकारी सुब्रत त्रिपाठी भी सिर्फ़ एक अभियुक्त को गोली मारने के पक्ष में नहीं हैं लेकिन मुठभेड़ में किसी को भी गोली लग जाने को वे बहुत आश्चर्यजनक घटना नहीं मानते हैं.
वहीं लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान इस घटना को राज्य की 'बिगड़ती क़ानून व्यवस्था' और 'बेलगाम पुलिस' का नतीजा बताते हैं.
वो कहते हैं, "जिस व्यक्ति पर पुलिस को संदेह था, उसके संदेह का क्या आधार था ये किसी को नहीं पता है. उसे पकड़ने की बजाय गोली मारकर पुलिस अपनी नाकामी छिपा रही है. जबकि सच्चाई ये है कि डेढ़ महीने से लापता बच्ची के बारे में उसे तब तक कोई जानकारी नहीं मिली जब तक कि उसकी लाश की सूचना दूसरे लोगों ने नहीं दी. यह अकेली घटना नहीं है बल्कि राज्य में आए दिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं."
मुठभेड़ को लेकर यूपी पुलिस पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं. हालांकि रिटायर्ड डीजीपी एके जैन के मुताबिक़ पहले के मुक़ाबले अब मुठभेड़ की घटनाएं बहुत कम होती हैं.
उनका कहना है, "मैंने जब सत्तर के दशक में नौकरी शुरू की थी, उस वक़्त सैकड़ों मुठभेड़ें हर साल होती थीं और कम से कम दो-ढाई सौ अपराधी मारे भी जाते थे. डकैती उन्मूलन अभियान में कितने डकैत मारे गए. लेकिन नब्बे के दशक के बाद मुठभेड़ों में इसलिए कमी आई क्योंकि मानवाधिकार आयोग, जांच एजेंसियों और सुप्रीम कोर्ट की सख़्ती के बाद पुलिस अधिकारियों में भी मुठभेड़ को लेकर डर पैदा हो गया."

Friday, June 14, 2019

يتبادل المستخدمون صوراً لمشاريع التصميم الداخلي في بيوتهم

وتقول غلين إن مُربي النحل إما غير قادرين على توسيع نشاطهم أو غير راغبين في ذلك نظرا لارتفاع تكلفة نقل العسل إلى الأسواق، واضطراب الإنتاج مثلما حدث قبل عامين عندما ضربت موجة جفاف كينيا.
وقد بدأت تقنيات جديدة تلوح في الأفق لتطوير هذه الصناعة التي تعتمد على طرق تقليدية.
ويتحدث تيرنس تشمباتي، وهو من زيمبابوي ويعيش في أوغندا، عن عدم توافر البيانات المتعلقة بصناعة العسل، وقد دفعه ذلك للعمل على تأسيس شركة "هاتشي هايف" لجمع المعلومات والأخذ بتوجه تقني للنهوض بالمناحل يشمل تتبع النحل لرصد المسافات التي يقطعها والزراعات المفيدة وبالتالي تشجيع المزارعين على غرس الأشجار المطلوبة قرب المناحل.
وتتابع الشركة عبر مناحلها الذكية عن بعد موقع الأعشاش ودرجة الرطوبة والحرارة والضوضاء والوزن فيما يعمل فريق على رصد المبيدات.
ونجحت "هاتشي هايف" في تجاوز الطرق التقليدية وبدأت إطلاق تجربتها في مائتي موقع.
وسوف تستفيد الكثير من المناحل من توافر بيئة معلوماتية على نحو يعزز الاستثمار ويقيس المكاسب مقابل الصعوبات التي تشمل مخاطر تهدد الملقحات البرية.
وعلى صعيد التوجه نحو جهود الحفاظ على البيئة لتصبح أكثر ربحية، قد تتصدر المناحل في منطقة أفريقيا جنوب الصحراء ركب الصناعات الأخلاقية التي تعتمد، إلى جانب تحقيق ربح، على حماية ملقحات النباتات، فضلا عن حماية الغابات وتوفير دخل مستدام، إلى جانب توفر فرص عمل جيدة.
في كل أسبوع، تسلط سلسلة حلقات "ذا بوس" التي تقدمها بي بي سي الضوء على سيرة رجل أعمال مختلف في شتى أرجاء العالم. وتتحدث حلقة هذا الأسبوع عن أدي تاتاركو، المديرة التنفيذية والمشاركة في تأسيس موقع "هاوز" الأمريكي المتخصص في أعمال تجديد المنازل.
عندما قررت أدي تاتاركو وزوجها تجديد منزلهما في ولاية كاليفورنيا في عام 2009، لم يجدا الأمر بالسهولة التي كانا يتوقعانها.
وتقول تاتاركو "كنا متحمسين بالفعل لتزيين المنزل وتجديده، وكانت لدينا الكثير من الأفكار للقيام بتلك المهمة، لكن عملية التنفيذ كانت بالغة الصعوبة. وكانت عملية البحث عن مهندسين معماريين ومصممين لديهم نفس الرؤية التي لدينا مضيعة للوقت".
لجأ الزوجان إلى الإنترنت طلبا للمساعدة، لكنهما وجدا شحا في المواقع الإلكترونية التي تقدم المساعدة وتوحي بالأفكار، فتولدت لديهما فكرة تأسيس موقع "هاوز".
ويقدم الموقع، القائم على ما يقدمه المتابعون من إسهامات بالأفكار والاقتراحات، مقالات وصوراً يرسلها مهندسون معماريون ومتخصصون في التصميم الداخلي، إضافة إلى نصائح تتعلق بشراء منتجات معينة.
ويبلغ عدد مستخدمي موقع "هاوز" اليوم 40 مليون مستخدم. وتشير أنباء إلى أن قيمته وصلت إلى أربعة مليارات دولار، وذلك بالرغم من أن أهداف الزوجين عندما أطلقاه قبل عشر سنوات كانت متواضعة.
ويستطيع مستخدمو الموقع الاستفادة من الأفكار المبتكرة، فضلا عن شراء منتجات والتعاقد مع خبراء.
وتقول تاتاركو، البالغة من العمر 46 عاما: "أردناه في الواقع أن يكون موقعا صغيرا، حيث لم نرغب في فقدان شعور المجتمع الصغير. لم نفكر على الإطلاق في التوسع خارج كاليفورنيا".
تولت تاتاركو وزوجها ألون كوهين، البالغ من العمر 48 عاما، في البداية إدارة الموقع كمشروع جانبي بالإضافة إلى عملهما الأساسي بنظام الدوام الكامل، إذ كانت هي تعمل في شركة استثمارية، بينما كان يعمل هو بمجال الهندسة في شركة "إي باي" للتجارة عبر الإنترنت.
كان هناك 20 مستخدما فقط مع إطلاق الموقع، جميعهم أولياء أمور تلاميذ في مدارس أبنائهما، إلى جانب مجموعة من المصممين والمهندسين المعماريين من منطقة خليج سان فرانسيسكو، والذين كانوا يعرضون خدماتهم.
وحقق الموقع نموا سريعا في عدد المستخدمين، لاسيما عندما بدأ المتخصصون توصية الزبائن بمتابعة موقع "هاوز".
وتقول تاتاركو "تلقينا بعد نحو ستة أشهر طلبات من نيويورك وشيكاغو تسأل عن إمكانية تدشين أقسام خاصة بهم على الموقع".
وتضيف "وفجأة بلغ عدد مستخدمي هذا الموقع المجتمعي الصغير 350 ألفا".
واستطاع الزوجان في عام 2010 تأمين أول مشروع استثماري لهما باقتراض مليوني دولار من أورين زييف، وهو ممول ينشط في وادي السيليكون. وترك الاثنان وظيفتيهما للتفرغ للعمل في المشروع، واستخدما المال المقترض في تعيين أول فريق عمل لديهما.
وتقول تاتاركو إن العثور على طاقم من الموظفين المناسبين كان من بين التحديات الكبرى.
وتضيف "أجرينا مقابلات شخصية لفترة طويلة مع كل متقدم للعمل، وكان نصف وقتنا مكرسا للبحث عنهم. كنا على دراية بأن التعاقد مع موظفين مناسبين يحملون نفس رؤيتنا يعد مسألة بالغة الأهمية ومفتاحا لعمل الموقع".
ويتقاضى "هاوز"، المتاح بالمجان لأصحاب المنازل والمتخصصين في العمارة والتصميم الداخلي، عمولة نسبتها 15 في المئة عن بيع منتجات من خلال قسم التسوق الخاص به، كما يعرض على منصته إعلانات ويبيع منازل وعقارات متميزة لحساب متخصصين في مجال التصميم والتجديد العقاري.
ويعتقد تشارلز بيتيس، رئيس شركة الهندسة المعمارية البريطانية "جيباد لندن"، أن موقع "هاوز" يعد مشروعا ناجحا لأنه يتيح فرصة أمام المستخدمين للاستفادة من "أفكار مبتكرة متخصصة" لتجديد المنازل.
ويضيف "في الماضي كانت المصادر الرئيسية للأفكار بالنسبة للراغبين في تجديد منازلهم تركز على مجلات التصاميم الداخلية وبرامج التلفزيون ومنازل الآخرين. أما اليوم، فتوجد الكثير من الأفكار المتاحة على الإنترنت".
ويستطرد "بيد أن هذه الصور والتصاميم الملهمة بأفكار قد تكون كثيرة جدا لدرجة تثير الحيرة، لكن منصات مثل (هاوز) تقدم عرضا منسقا لبعض أفضل مشروعات تجديد المنازل".
قرر كوهين وتاتاركو في عام 2013 توسيع نطاق مشروعهما في الخارج بعد أن أدركا أن ثلث مستخدمي "هاوز" تقريبا هم من خارج الولايات المتحدة، فدشن الزوجان موقعا في البداية في أوروبا، ثم في آسيا، ليصبح اليوم نصف عدد المستخدمين من خارج الولايات المتحدة.
كما افتتح "هاوز" ستة مكاتب على مستوى العالم، في أماكن مثل لندن وبرلين وسيدني.
وساعد هذا النمو في جمع ما يزيد على 600 مليون دولار من مستثمرين حتى الآن، لكن يقال إن الشركة لم تحقق أرباحا بعد.
وكانت الشركة قد أعلنت في يناير/ كانون الثاني الماضي أنها بصدد تقليص نحو 10 في المئة من موظفيها البالغ عددهم 2000، وهو ما يعني إنهاء عقود 110 موظفين من بريطانيا وألمانيا، فضلا عن 70 موظفا في الولايات المتحدة.
في الوقت نفسه، أشارت تقارير إلى أن الشركة توسعت بسرعة كبيرة جدا على نحو أثار الشكوك بشأن ما إذا كانت تمتلك استراتيجية عمل سليمة.
وقال متحدث باسم الشركة لمدونة "تيك كرانش" الإلكترونية "أعدنا هيكلة وتنظيم القوة العاملة لدينا على مستوى العالم بغية مضاعفة العمل في المناطق ذات التأثير الأكبر في عمل (هاوز). توجد دائماً صعوبة في إعادة الهيكلة أثناء مراحل النمو، مع الأخذ في الاعتبار بتأثير ذلك على حياة الناس".
وتقول الشركة، على الرغم من الانتكاسة، إن نشاطها التجاري لا يزال قويا. وهناك شائعات تتحدث عن اعتزامها تسجيل أسهمها في سوق للأسهم.
وتواصل الشركة تحديث خدماتها، حيث طرحت أداة متطورة تتيح رؤية واقعية من خلال تطبيقها الإلكتروني الخاص لما سيبدو عليه الأثاث والتصاميم المختلفة داخل منزلك.
كما تمثل قناة "هاوز" التلفزيونية التي تعرض مقاطع فيديو لتجديد منازل المشاهير على الإنترنت، طفرة كبيرة. وهي فكرة كان طرحها الممثل أشتون كوتشر، أحد المستثمرين في هاوز، والذي ظهر في الحلقة الأولى من هذه الفيديوهات.