Monday, May 27, 2019

المجلس العسكري السوداني "صمام أمان" أم "ثورة مضادة"؟

علقت صحف عربية بنسختيها الورقية والإلكترونية على أول زيارة يقوم بها رئيس المجلس العسكري السوداني عبد الفتاح البرهان لمصر منذ توليه منصبه، منطلقا منها إلى الإمارات، والتي تزامنت مع زيارة قام بها نائبه الأول محمد حمدان دقلو (حميدتي) للسعودية.
ورأى كُتّاب أن هذه الزيارات تعكس توجه المجلس العسكري السوداني نحو المحور الذي تقوده السعودية والإمارات ومصر والبحرين في مقابل قطر وتركيا، بينما رأى آخرون أن المجلس يقود "ثورة مضادة" في السودان.
يقول صلاح الدين مصطفى في "القدس العربي" اللندنية: "مراقبون يرون أن الزيارتين اللتين قام بهما محمد حمدان حميدتي... للمملكة العربية السعودية يوم الخميس ومن بعده رئيس المجلس عبد الفتاح البرهان إلى مصر(السبت)، تشيران إلى أن السودان حسم أمره بالتوجه نحو محور السعودية والإمارات".
ويرى عماد الدين حسين، رئيس تحرير "الشروق" المصرية، أن اختيار البرهان القاهرة كأول محطة له منذ توليه منصبه "إشارة مهمة جدا ينبغي عدم إغفالها لتأسيس علاقات قوية بين البلدين، شرط أن تستقر الأمور أولا بين المجلس الانتقالي وقوى الحرية والتغيير، ويتوصل الجانبان إلى توافق عام يتيح للسودان أن ينطلق للأمام".
ويقول محمد أبو الفضل في صحيفة "العرب" اللندنية إن المجلس العسكري "ارتكز على ما حصده من دعم عربي وأفريقي، وبدأ يزيد من سرعة تحركاته على المسارين، ويرسل إشارات تطمين لقوى إقليمية ودولية منخرطة في مجابهات مصيرية مع العناصر المتطرفة ومكافحة الإرهاب".
ويضيف بأن زيارة البرهان لكل من مصر والإمارات كشفت "عمق العلاقة بين السودان الجديد والفضاء العربي، حيث جاءت بعد زيارة قام بها نائبه الفريق أول محمد حمدان دقلو (حميدتي) للسعودية، بما يؤكد انحياز الخرطوم لتحالف مصر والسعودية والإمارات على حساب محور قطر وتركيا".
ويؤكد الكاتب أن المجلس العسكري "نجح في تسويق نفسه بحسبانه صمام أمان رئيسي للسودان وجيرانه، وأبعده التحلي بالرشد عن الدخول في دوامة خطيرة من التجاذبات، الأمر الذي جعل الفضاء الإقليمي مهيأ لتقديم أنواع جديدة من الدعم السياسي والاقتصادي لإدارة المجلس العسكري على حساب قوى الحرية والتغيير".
وتعليقا على التحية العسكرية التي أداها البرهان للرئيس المصري عبد الفتاح السيسي أثناء زيارة الأول للقاهرة، تقول "القدس العربي" اللندنية إنها "تعبر عن حقيقة ما يطمح إليه المجلس العسكري في السودان بتكرار السيناريو المصري: ركوب ثورة الجماهير وتقديم التنازلات الشكليّة لها... ثم الانقضاض عليها وإعادة النظام القديم مع تغطية إقليمية جديدة يمثّلها حلف 'الثورة المضادة' في مصر والإمارات والسعودية والبحرين".
وتضيف الصحيفة في افتتاحيتها: "على بساطتها الرمزية، تظهر التحيّة العسكرية أن المجلس العسكري صار تحت 'إمرة' حلف 'الثورة المضادة'، التي بدأت بتقديم 'الملاءة' النقديّة اللازمة لدفع أجور جنود القوات المسلحة".
وترى الصحيفة أن إعلان حزب الأمة رفْض المشاركة في الإضراب العام الذي أعلنته قوى الحرية والتغيير يُظهر "تأثير الإمارات التي كانت تستضيف زعيم حزب الأمة الصادق المهدي لسنوات خلت قبل الثورة، وهذا يعني أن 'الثورة المضادة' انتقلت إلى الخطوة الثانية بعد تأمين المجلس العسكري، وهي شق المعارضة".
وفي جريدة "الراكوبة" السودانية، يقول الفاضل عباس محمد علي: "لقد أبدى كل من حميدتي وبرهان ما يشير إلى أنهما ينفذان أجندة أجنبية، وأنهما مشبّعان بالطموح للانفراد بالأمر على طريقة السيسي الذى ورث ثورة 30 يونيو 2013 الشعبية المصرية، وأنهما مثل علي عبد الله صالح يرقصان فوق رؤوس الأفاعي، ويلعبان الروليت مع مناديب الحرية والتغيير".

Tuesday, May 14, 2019

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

हालांकि स्टुअर्ट फ्लिन्डर्स ने अपनी किताब में इसका कोई जिक्र नहीं किया है और ये एक तरह से सही भी था.
जॉन निकोल्सन की इस जीवनी में दिल्ली वालों के बारे भी पढ़ना दिलचस्प है जो कभी-कभी उनके मकबरे पर जाते हैं.
एक आयरिश डॉक्टर के पांच बेटों में सबसे बड़े जॉन की प्रतिमा दिल्ली के कश्मीरी गेट से हटाकर बेलफास्ट भेज दी गई.
और अब वो मूर्ति उत्तरी आयरलैंड के डंगैनन शहर की शोभा बढ़ा रही है.
निकोल्सन अपने लोगों के 'डार्क हीरो' थे तो प्रसिद्ध मुल्तानी हॉर्स की टुकड़ी के के जवानों के बीच 'निकल सेन' नाम से मशहूर थे.
ये जवान उनके अंतिम संस्कार के अवसर पर फूट-फूट कर रोये थे और उसकी कब्र की घास अपने हाथों में लेकर उन्होंने लड़ाई में आगे हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था.
इन सैनिकों ने मुल्तान से भी आगे अपने उन स्थानों पर वापस लौटना और 34 साल की आयु में ही प्राणों की आहूति देने वाले अपने दिवंगत कमांडर के सम्मान में शोक मनाना पसंद किया जहां से वे आए थे.
मुल्तान अब पाकिस्तान में है और यहां निकोल्सन की एक और प्रतिमा के स्थापित होने का इंतजार है.
साथी सैनिकों की इसी मोहब्बत ने अनजाने में ही रहस्यमयी पंथ 'निकल सेन' को जन्म दिया.
हालाकि इस बात पर हैरत होती है कि यदि निकोल्सन की ज़िंदगी लंबी होती तो क्या उन्हें इसी तरह की शोहरत हासिल होती और क्या उनके निष्ठुर तौर-तरीकों से उनकी लोकप्रियता पर ग्रहण नहीं लग जाता?
फ्लिन्डर्स कहते हैं कि इस घटना के करीब डेढ़ सदी बाद मुगलों का बसाया ये शहर काफी बदल चुका है.
वो लिखते हैं, "ब्रिटिश हुकूमत के वक़्त के शाहजहांनाबाद शहर और उनके द्वारा बसाई गई नई दिल्ली के बीच हमेशा की तरह ही कम से कम सरकारी इमारतों के इर्द-गिर्द के इलाकों के मामले में अंतर साफ नजर आता है."
"अंग्रेजों के 1947 में भारत छोड़ने के बाद दोनों ही शहरों के बेतरतीब विकास की वजह से दोनो ही बौने लगते हैं. यहां तक कि नदी ने भी अपना रास्ता बदल लिया है. लाल किले के साथ जहां कभी यमुना या जैसा ब्रिटिश बुलाते थे जमुना, बहती थी वहां अब एक व्यस्त राजमार्ग बन चुका है."
वो आगे लिखते हैं, "दिल्ली के रिज इलाके, जहां निकोल्सन ने हमले के लिए बड़े धीरज के साथ इंतजार किया था, ने शहरीकरण का उसी तरह विरोध किया है जिस तरह से उसने 1857 की गर्मियों में लंबे गतिरोध के दौरान डेरा डाले ब्रिटिश सैनिकों को बचाया था."
"जैसे ही मैंने रिज क्षेत्र में अपना रास्ता तय करना शुरू किया तो बंदरों के हमले का एकमात्र खतरा सामने आया जो रास्ते की झाड़ियों में छिपे थे. वहां से एक टैक्सी में सवार होकर मैं थोड़ी दूर स्थित अलीपुर रोड के उस मार्ग पर गया जिस पर 14 सितंबर की सुबह निकोल्सन ने अपने जवानों के साथ कूच किया था."
"कुदसिया बाग का हिस्सा, जहां धावा बोलने वाली टुकड़ियों के कॉलम बनाए गए थे, आज भी मौजूद हैं. लेफ्टिनेन्ट रिचर्ड बार्टर ने शहर की दीवार से दूर होते समय गुलाब की खुशबू के साथ बंदूकों से निकली सल्फर की गंध महसूस की थी."
"ये देखकर हैरत हुई कि 160 साल बाद आज भी वहां गुलाब के पौधे हैं, शायद इसी स्थान पर बेहद उत्तेजित जवानों ने हमला शुरू करने से पहले एक दूसरे के लिये अच्छे नसीब की दुआ की होगी."
"इस उद्यान के सामने शहर की दीवार और कश्मीर बैस्टियन के अवशेष, जिन पर निकोल्सन और उसके जवान चढ़े थे, अभी भी हैं. एक बार फिर बंदरों ने उस वक्त छीना झपटी शुरू कर दी और मैं शहर की नई मेट्रो रेलवे लाइन के शेड की छाया में खड़ा देखता रहा."
"इसके बाद, मैं कश्मीरी गेट आया. दुश्मन को दीवार के किनारे से खदेड़ने के लिए वापस लौटने से पहले निकोल्सन ने इसी जगह से शहर की ओर कूच किया था. हालांकि यहां परिवहन टर्मिनल के बढ़ते दबाव के बावजूद कश्मीरी गेट को अभी भी संरक्षित रखा गया है और हाल ही में इसके आसपास लैंडस्केपिंग की गई है."
इसके आगे दीवार गायब हो गई है, लेकिन लोथियन रोड के साथ कुछ दूरी तय करना इस बात का संकेत था कि मैं अभी भी निकोल्सन के पदचिन्हों पर ही हूं. वहां दाहिनी ओर निकोल्सन रोड थी जिस पर एक ओर दुकानें और मकान बन गये थे जबकि दूसरी ओर दीवार का एक दूसरा हिस्सा था."
"आधे मील से अधिक की दूरी पर इसमें इतना मामूली बदलाव आया है कि सहज ही ये महसूस होता है कि निकोल्सन खुद यहां हैं और मानो वो दीवार के साथ ही चल रहे हैं. लेकिन तभी आधुनिक दिल्ली सामने आने लगी."
"निकोल्सन के निधन के बाद के दशक में निर्मित पुरानी दिल्ली स्टेशन की ओर जाने वाली रेलवे लाइन पर अचानक ही निकोल्सन रोड खत्म हो गई. थोड़ा सा रास्ता बदलकर रेलवे के दूसरी ओर जाने पर मैं वहां पहुंच गया जहां कभी काबुल गेट था."
"इसके दक्षिण में दीवार के साथ साथ नया बाज़ार रोड चल रही है मगर निकोल्सन को कहां गोली मारी गई थी? बर्न बैस्टियन और लाहौरी गेट अब वजूद में नहीं थे. उनकी दिशा में चलने पर उस स्थान का पता लगाना असंभव था. नया बाजार की संकरी लेन में बैठे लोग निकोल्सन के नाम से अनजान थे और वे मदद करने में सक्षम नहीं थे."
"हमेशा से ही ये इतना मुश्किल नहीं था, लार्ड कर्जन ने 20वीं सदी में पहले वायसराय के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कश्मीरी गेट के पास से इसी तरह की यात्रा शुरू की थी. काबुल गेट से करीब 80 गज की दूरी पर उन्हें दीवार पर एक पट्टिका मिली थी."
"पट्टिका पर वो जगह चिन्हित थी जहां ब्रिगेडियर जनरल जॉन निकोल्सन 14 सितंबर, 1857 के हमले में बुरी तरह जख्मी हो गए थे."
दिल्ली में ये दीवार और पट्टिका 1940 के दौर में ली गई तस्वीरों में देखी जा सकती है परंतु अब दोनों को ही ध्वस्त कर दिया गया है. हालांकि यादें अभी भी बाकी हैं.

Friday, April 5, 2019

التليغراف: "ليبيا تستعد للحرب"

تناولت أغلب الصحف البريطانية الصادرة صباح الجمعة الملف الليبي، ومنها جريدة التايمز التي نشرت تقريرا موسعا لمراسلها في ليبيا ريتشارد سبنسر بعنوان "القائد المارق يأمر قواته بالزحف على طرابلس".
وتوضح الجريدة أن استيلاء اللواء السابق في جيش القذافي خليفة حفتر على مدينة غريان التي تبعد 80 كيلومترا فقط عن العاصمة الليبية طرابلس يهدد باشتعال الحرب مرة اخرى في ليبيا.
وتضيف الجريدة أن حفتر الذي يلقى الدعم من كل من مصر والإمارات تمكن من تأسيس أكبر منطقة حكم ذاتي تحت سيطرته في شرق ليبيا منذ انهيار نظام القذافي.
أما جريدة الغارديان فنشرت تقريرا لكبير مراسليها لشؤون الشرق الاوسط رولاند اوليفانت يقول فيه إن ليبيا تستعد للحرب المقبلة والتي قد تدمر كل ماتبقى بعد سنوات القتال السابقة.
ويضيف اوليفانت ان اللواء السابق في الجيش الليبي إبان حقبة الديكتاتور السابق معمر القذافي تحدى الأمم المتحدة وأصدر الأوامر لقواته بالزحف نحو العاصمة طرابلس بهدف الإطاحة
وتضيف الجريدة أن السراج من جانبه أصدر اوامره بنشر القوات وتنفيذ غارات جوية عند الحاجة لوقف أي هجوم على المدينة كما أن المجموعات المسلحة القوية التي تسيطر على منطقة مصراته اعلنت انها مستعدة للمشاركة في أي عمليات عسكرية لدعم حكومة السراج في وجه قوات حفتر.
وتشير الجريدة إلى ان محاولة حفتر لم تتأخر سوى ساعات معدودة عن زيارة انطونيو غوتيريش الأمين العام للأمم المتحدة لطرابلس لمقابلة السراج بهدف دعم مؤتمر للمصالحة الوطنية في ليبيا كان من المخطط أن ينعقد منتصف الشهر.
وتوضح الجريدة أن حفتر يسيطر على الشرق الليبي ويقيم حكومته في مدينة بنغازي ويحظى بدعم مصر والإمارات في محاولة لتنصيب حاكم علماني قوي يعيد الأمور إلى ماكانت عليه في ليبيا ويقهر الفصائل الإسلامية بينما يقول منتقدوه إنه سيصبح حاكما ديكتاتوريا جديدا على غرار القذافي لو سيطر على غرب البلاد.
الغارديان نشرت تقريرا عن ملف الحرب في اليمن بعنوان "الكونغرس يصوت لإنهاء الدعم العسكري للسعودية في حربها في اليمن".
يقول التقرير إن الكونغرس أصدر بذلك القرار النهائي بهذا الصدد في محاولة غير مسبوقة لتقييد قدرة الرئيس الأمريكي على الذهاب إلى الحرب بشكل عاجل كما أنه يشكل تحديا جديا لسياسات دونالد ترامب الخارجية.
وتعتبر الجريدة أن صدور القرار من الكونغرس خاصة في هذا التوقيت يمثل أزمة جديدة بين الكونغرس وترامب الذي يهدد بوقف تنفيذه حيث كشف البيت الأبيض أنه يعتقد أن القرار يشكل انتهاكا للدستور الأمريكي.
وتشير الجريدة إلى أنها المرة الأولى التي يصدر فيها الكونغرس قرارا حسب قانون حرب 1973 لوقف السلطات التنفيذية للرئيس ومنعه من الزج بالبلاد في حروب خارجية طويلة الأمد.
ويعتبر التقرير أن قطاعا كبيرا من النشطاء يعتقدون أن الطريقة الوحيدة لوقف الحرب المستمرة منذ 5 سنوات في اليمن و منع وقوع مجاعة قاسية تقتل الملايين هي ان تقوم الولايات المتحدة بالضغط على السعودية لوقف الغارات الجوية التي تشنها في اليمن والانخراط في محادثات السلام.
بحكومتها التي يتزعمها فايز السراج و تحظى بدعم المنظمة الدولية.
التايمز نشرت مقالا لمراسلها لشؤون الشرق الأوسط ريتشارد سبنسر بعنوان "المفاعل النووي السعودي يثير المخاوف من سباق تسلح جديد".
وتقول الجريدة إن المملكة العربية السعودية أوشكت على الانتهاء من مفاعلها النووي الأول رغم انها لم تنته بعد من الاتفاقات المطلوبة مع الأمم المتحدة وهو الأمر الذي يهدد بسباق تسلح جديد في منطقة الشرق الأوسط.
وتوضح الجريدة أن صور الأقمار الاصطناعية من مدينة الملك عبد العزيز للعلوم والتكنولوجيا قرب الرياض توضح أن المفاعل يمكن ان يبدأ العمل في خلال أقل من سنة حسب ما تنقل عن روبرت كيللي مدير التفتيش السابق في الوكالة الدولية للطاقة الذرية.
وتضيف الجريدة أن شركة إنفاب الحكومية الأرجنتينية هي التي تتولى بناء المجمع والذي يبدو أنه اكثر تطورا مما ظن أغلب المحللين بينما تخطط المملكة للإعلان عن مناقصات لبناء مفاعلين نووين آخرين بغرض توليد الكهرباء حسب ما يقول المسؤولون لكن عددا من اعضاء الكونغرس الأمريكي خاصة من الحزب الديمقراطي يخشون من ان المملكة تخطط للدخول في سباق للتسلح النووي مع إيران.

سارغي مان رسام أعمى يعتمد على اللمس والذاكرة لرسم لوحاته

في المعرض الذي استضافته قاعة المدرسة الملكية للرسم "رويال دروينغ سكول" في لندن، للرسام البريطاني الراحل سارغي مان، تجد نفسك في فضاء حميم يشع بالألوان ويفيض ببهجة الضوء، لكنك لن تصدق أن من يقف وراء هذا الإبداع يعيش في ظلام مطبق ولا يرى غير العتمة بعد أن فقد بصره.
لقد نجح مان في أن يستبدل البصر بالبصيرة، ويبدد العتمة التي نزلت على عينيه باستعادة أشكال من أحبهم من ذاكرته وسط مناظر طافحة بالحميمية والألفة العائلية والألوان المبهجة، نقلها عبر تلك الحساسية المفرطة للجمال في الطبيعة التي ميزت أعماله.
لقد زحفت العتمة تدريجيا على عالم مان بعد مرض أَلمَ بعينيه في الثلاثينيات من عمره، حتى أطبقت عليه كليا ليفقد بصره نهائيا في السنوات الخمس الأخيرة من عمره (توفي في عام 2015)، وقد كرس هذا المعرض للوحاته التي رسمها في هذه السنوات فقط أي في مرحلة العمى التام.
وعلى العكس من الظلام الذي يطبق على عيني مان، نرى في لوحات المعرض فيضا من الضوء يشع من نوافذ أو أبواب لينير غرفا وفضاءات هندسية محددة تحتشد بشخصيات من عائلته وأصدقائه رسمهم بحميمية واضحة وسط كرنفال لوني مشع.
عُرف مان، المولود عام 1937، برسم المناظر الطبيعية والبروتريه أحيانا، وقد أقام معرضه الشخصي الأول في لندن عام 1963، كما عمل مدرسا للرسم بعد تخرجه من كلية كامبرويل للفنون مطلع الستينيات مركزاً في دروسه لطلبته وبحثه الجمالي على دراسة القوة التحويلية للضوء واللون والعلاقة بينهما.
بدأت مشكلة الإبصار مع مان وهو في أوج عطائه في عام 1973، عندما أصيب بالسّاد (الماء الأبيض أو إعتام عدسة العين) أعقبته إصابته بانفصال الشبكية في كلتا عينيه، الأمر الذي انتهى بفقدانه القدرة على الإبصار نهائيا.
خلال فقدان البصر التدريجي، حرص مان على مواصلة الرسم بتطوير تقنيات تساعده في عمله، كتحوير عدسات تيلسكوب تساعده في تكبير الصور، حتى انتهى بعد عماه إلى الاعتماد على حاسة اللمس واستخدام عجينة لاصقة وأربطة مطاطية لتحديد حدود الأشكال التي يريد رسمها على قماشة اللوحة.
ولعل الراصد لمجمل نتاج مان في مختلف مراحله سيكتشف أنها تعكس بوضوح هذا الصراع مع فقدان البصر التدريجي، وقدرته على استثمار ما يتعرض له في سياق بحثه الفني والجمالي بدءاً من الغشاوة التي بدأ يرى فيها الألوان، حيث بدأ دماغه يراها تصطبغ باللون الأزرق، ومرورا بتجربة أن يرى الأشياء مزدوجة في أحدى عينيه ومفردة في الأخرى وانتهاء بظلام فقدان البصر التام.
وطور مان، في تحديه لمحنته تلك، استراتيجية لمواصلة إبداعه الفني لم تتوقف عند تلك التقنيات الحسية القائمة على اللمس، بل زاوجها مع الاعتماد على عمليات إدراكية ومعرفية لخلق صور
لقد فرضت تجربة العمى على مان التحول من رسم المنظر الطبيعي إلى رسم الأشخاص ضمن نزعة تصميمية واضحة في فضاءات هندسية محددة، مصحوبة بحرية وجرأة في استخدام اللون عمادها تخيل هذا اللون حدسيا لا استخدامه كنتاج لرؤية مباشرة.
وفي الفيلم يعبر مان عن خياراته الفنية تلك وأثر فقدانه قدرة الرؤية فيها بقوله "اختار التناغم اللوني في كل لوحة حدسيا، مفكرا بطريقة تصميمية (تزينية) واضحة لم أكن أبدا أسمح لنفسي بفعلها سابقا. يبدو أن العمى قد منحني حرية استخدام اللون بطرق لم أكن أجرؤ عليها عندما كنت مبصراً".
ولم تكن خيارات مان الأعمى بعيدة عن بحثه الجمالي وخلاصاته الفنية وتأثراته طوال حياته عندما كان رساماً مبصراً، إذ عشق لوحات الرسامين الفرنسيين بيار بونار و كلود مونيه، ووصف الأخير في شهادته بأنه كان مثله يعاني من اعتام في عدسة العين يجعل الأشياء تبدو من خلال غلالة من اللون الأصفر - البني، بيد أن تعلق مان ببونار وأسلوبه في الرسم من الذاكرة وليس من المشاهدة المباشرة منحه إحساسا خاصا بالفضاء ساعده كثيرا في الرسم أثناء محنة عماه.
ترجع علاقة مان ببونار (يستضيف متحف التيت للفن الحديث أكبر معرض استعادي له في العاصمة البريطانية حاليا)، إلى مشاهدته أعماله في المعرض الاستعادي الذي أقيم في الأكاديمية الملكية للفنون بلندن في عام 1966، وعمل لاحقا قيما مشاركا في إعداد معرض له في غاليري هيوارد بلندن في عام 1994.
لقد انجذب مان ليس إلى حرية بونار واستخدامه الإبداعي المميز للون فحسب، بل إلى معالجته للمكان، ونزعته التصميمة المميزة في توزيع كتله وأشكاله في فضاء اللوحة، لاسيما تلك الزوايا الواسعة التي ينظر فيها إلى موضوع لوحته، التي تسمح له بتوسيع حقل الرؤية للنظر إلى العديد من التفاصيل الهامشية في المحيط وضمها في إطار لوحته.
وعن ذلك كتب مان في دراسة شهيرة نشرها عن بونار: "لتمثيل حقل الرؤية بالنسبة لبونار كانت زاوية 60 درجة معتادة تماما، وزوايا 80 إلى 90 درجة لم تكن غير مألوفة لديه، لكنني وجدت أن لوحتين من لوحاته تمتد كل واحدة منهما في زاوية لا تصدق تصل إلى 130 درجة من اليسار إلى اليمين".
ولم يكتف مان بتحدي محنة فقدان البصر، بل حرص على استثمارها في سياق تعميق بحثه الجمالي عن المرئي وغير المرئي وعن الحضور والذاكرة، وتعزيز النهج الذي تَرّسم فيه بونار في الرسم من الذاكرة وليس من الطبيعة مباشرة أو ما يمكن أن نسميه هنا "الرسم المتخيل".
لقد أعطته تجربة العمى تلك حرية أكبر في تقديم تطبيق خالص لهذا النهج إلى الدرجة التي يمكننا القول أن العمى حرره تماما من كل تشويش يمكن أن ينجم عن حضور الأشياء أثناء المشاهدة المباشرة للطبيعة على تمثيلاتها التي يستحضرها من ذاكرته في سياق تعامل إبداعي خلاق وليس تقليدا وتماهيا مع تلك الطبيعة.
ويوضح مان في شهادته تلك الحقيقية بقوله "بالطبع، لم أختر أبدا أن أصبح رساما أعمى، لكنني كنت متشوقا لاكتشاف أنه يمكنني رسم لوحات من دون إبصار، وهذا النشاط يبدو إلى حد كبير استمرارا لتجربتي في الرسم بشكل قد يكون أكثر مما تخيلته".
ه الفنيه، معتمدا على الذاكرة "التي يصفها بأنها "رافقتني كنوع من التميمة"، فباتت الذاكرة والخيال والحدس متممات الرؤية لديه وأدواته في خلق أشكاله الفنية.
وعلى الرغم من ضعف بصره، ظل مان يقوم برحلات لمواصلة ولعه برسم المناظر الطبيعية، ويصف في شهادة نشرها موقع بي بي سي عام 2015 تجربته في الرسم في هذه الرحلات بقوله "أفضل دائما الرسم في الضوء الساطع، ومنذ ذلك حتى عماي التام في عام 2005 ذهبنا مرات عديدة إلى إيطاليا وفرنسا، كما ذهبت إلى البرتغال وجنوب الهند مع اختي. في الهند والبرتغال، وفي بعض الأحيان في إيطاليا، حدث أن قضيت اليوم الأول في غرفة مظلمة رفقة نوع من الحمى، لكن دماغي ظل متكيفا مع مستويات الضوء الأكثر إشعاعا في المحيط الخارجي. وفي اليوم الثاني ذهبت لأكتشف عالما جميلاً مختلفاً ومدهشاً بإشراق ضوء جديد".
وسبق لمان خلال حياته أن شرح تجربته الفنية والتقنيات والأساليب التي طورها لتحدي محنة فقدانه البصر ومواصلة عمله الفني في أكثر من فيلم وثائقي، من بينها فيلم أنتجته بي بي سي عام 2014 تحت عنوان "الرسام الأعمى سارغي مان: رسم برؤية داخلية"، وآخر أنتجه ابنه بيتر مان في عام 2006 تحت عنوان "سارغي مان".
وفي الفيلم الأخير نرى مان برفقة ابنه في رحلة إلى قرية في شمالي شرق إسبانيا، وهو يحاول مواصلة نهجه في رسم المناظر الطبيعية في الأيام الأخيرة قبل فقدانه البصر نهائيا، ونرى كيف يحاول أن يستخدم حسه الهندسي لحساب أبعاد المكان الذي يتلاشى من أمام بصره.
ففي أحد المشاهد نراه يحاول على شرفة مطلة على البحر حساب أبعاد المكان وتلمس حدود الجدار وتفاصيل الشرفة، وعند مشاهدة المعرض الأخير نرى انعكاس ذلك في لوحتين رسمهما بناء على تجربته تلك، في ذات الفضاء الذي تخيله ذهنيا مع شكل زوجته وبعض أفراد عائلته بملابس السباحة.

Friday, January 18, 2019

مصر.. السيسي يكلف الحكومة بالتعامل مع طلاء عقارات الدولة

أعلن رئيس الوزراء المصري مصطفى مدبولي، اليوم الخميس، عن وجود تكليف من الرئيس عبد الفتاح السيسي بالتعامل مع المباني التي ما زالت واجهاتها غير مطلية حتى الآن.
وأشار رئيس الوزراء المصري خلال الاجتماع الثالث لمجلس المحافظين، إلى أنه يتم التعامل مع جميع المباني التي لم تقم بطلاء واجهاتها، بحيث يتم الانتهاء من طلاء الواجهات الأربع لهذه المباني في مهلة محددة، أو اتخاذ الإجراءات القانونية ضدها.
وأوضح أن ألوان هذه الواجهات ستكون موحدة، بدلا من هذا المشهد غير الحضاري، حيث توجد مبان كثيرة في مناطق مختلفة واجهاتها عارية فوق "الطوب الأحمر"
وأوعز مدبولي للمحافظين بالبدء في تنفيذ هذا التكليف على مراحل، بمناطق محددة، لافتا إلى أنه ستكون هناك متابعة دورية للوقوف على آخر المستجدات، مضيفا: "هذا ما يحدث في كل دول العالم".
وجاء الاجتماع بهدف الوقوف على آخر المستجدات المتعلقة بملف استرداد أراضي الدولة، وتقنين الأوضاع.
شدد الرئيس السوري بشار الأسد على أهمية تعزيز العلاقات بين دمشق وموسكو، لا سيما في ظل تصعيد بعض الدول الغربية للحملة المعادية لروسيا في الفترة الأخيرة.
وجاء تصريح الأسد خلال استقباله اليوم الخميس وفدا من حزب روسيا الموحدة برئاسة عضو مجلس الدوما دميتري سابلين.
وقال الرئيس السوري: "الضغوط والسياسات التي تنتهجها بعض الدول الغربية ضد روسيا مع كل انتصار يتحقق ضد الإرهابيين في سوريا، هو خير دليل على أن الحرب الإرهابية التي تم شنها على الشعب السوري لم تعد تقتصر على سوريا فقط، ومن هنا تأتي أهمية تمتين العلاقات السورية الروسية في هذه المرحلة المهمة من تاريخ المنطقة".
وجاء استقبال الأسد للوفد الروسي بعد أن عقد الأخير لقاء مع رئيس مجلس الشعب السوري حمودة صباغ أمس الأربعاء.
وفي تصريح للصحفيين عقب ذلك اللقاء، أشار سابلين إلى أنه لمس بعد خمسة أعوام مضت على زيارته الأولى لسوريا مدى تحسن الأوضاع، وقال "أهم ما رأيناه هو انتصار الجيش العربي السوري على معظم المجموعات الإرهابية بدعم من حلفائه"، مضيفا: "إنني فخور بأن بلدي هو في الصفوف الأولى للدول التي تدعم سوريا في مكافحة الإرهاب الدولي".
أعلنت وزارة الدفاع القطرية أنها قدمت اليوم الخميس هبة عسكرية للجيش الصومالي وصلت عبر ميناء مقديشو، مكونة من 68 عربة مدرعة حديثة.
وقالت الوزارة إن هذه المنحة تأتي "في إطار دعم دولة قطر لجمهورية الصومال الشقيقة شعبا وحكومة"، لتسهم في الشدّ من عضد مؤسسات الدولة في الصومال و"الحكومة المركزية المعترف بها دوليا، ودعم جهودها الحثيثة لإرساء الأمن ومحاربة الإرهاب والتطرف".
تجدر الإشارة إلى أن الدعم القطري يأتي بعد أن شهدت العلاقات بين مقديشو وجارة قطر وخصمها الإمارات تدهورا ملحوظا العام الماضي على خلفية اتهام الحكومة الصومالية للإمارات بانتهاك "مواثيق القانون الدولي التجاري والتدخل في الصومال عبر استثمارات غير شرعية في البلاد".
أوضحت السفارة السورية في لبنان أن السفير علي عبد الكريم اعتذر عن حضور مراسم افتتاح القمة الاقتصادية المرتقبة في بيروت، وأن الدعوة موجهة لحضور مراسم الافتتاح وليس لحضور القمة.
وبحسب صحيفة "الوطن" السورية، أكد السفير السوري لدى لبنان علي عبد الكريم علي اليوم الخميس، اعتذار سوريا عن المشاركة في القمة الاقتصادية المنعقدة في بيروت من الجمعة حتى الأحد المقبل، بعد تلقيها دعوة للمشاركة من الرئاسة اللبنانية.
وأشار علي في مقابلة مع قناة "الميادين"، أنه "من الطبيعي أن نعتذر عن عدم المشاركة في القمة الاقتصادية مع احترامنا للجهة الداعية، لأن جامعة الدول العربية لم تتراجع عن الخطيئة التي ارتكبتها بحق دمشق".
وتحدث علي عن وجود آراء كثيرة في لبنان "ترى ضرورة دعوة سوريا إلى القمة الاقتصادية"، مشيرا إلى أن "الشعبين اللبناني والسوري شقيقان والأوضاع الاقتصادية والحياتية تتطلب تكاملا اقتصاديا بين البلدين"

Friday, December 28, 2018

خبراء ورجال أعمال: نمو قوي لأصول وودائع قطاعنا المصرفي في 2019

وصف مستثمرون وخبراء مصرفيون ارتفاع أصول القطاع المصرفي المحلي بأنه إيجابي، ويدل على قوة الاقتصاد والنمو المتسارع الذي يحققه.
وقالوا إن البنوك والمصارف القطرية قادرة على المحافظة على أصولها، وزيادة ارتفاع الأصول والودائع واستمرار النمو في القطاع البنكي، خاصة مع التحسن المستمر في الأداء والكفاءة التي يتمتع بها القطاع في قطر، كما أكدوا قدرة البنوك على توفير سيولة والوفاء بالمتطلبات المالية للدولة، مع الزيادة المستمرة في المشاريع التنموية واستعداد البلاد لاستضافة المونديال في 2022.
وأشاروا للموازنة العامة الجديدة للعام 2019 التي اعتمدها مؤخراً حضرة صاحب السمو الشيخ تميم بن حمد آل ثاني أمير البلاد المفدى، وقالوا إنها مؤشر ايجابي لقطاع البنوك وتؤكد قوة قطاع البنوك.
وأوضحوا أن البيانات تتزامن مع التوقعات الإيجابية لصندوق النقد الدولي بنمو الناتج المحلي بنحو 3.1% في 2019، مقابل توقعاته بنموه بنحو 2.4 % في 2018. وكان الصندوق قد افاد بأن تقديراته تشير إلى أن احتياطيات البلاد من النقد الأجنبي سترتفع إلى 36 مليار دولار. وقالوا إن ذلك يأتي بفضل الإجراءات المالية الضخمة التي اتخذتها الدولة ومكنتها من مواجهة الصدمات والتحديات المختلفة.
هذا وقد بلغ إجمالي أصول القطاع المصرفي القطري الشهر الماضي 1393.3 مليار ريال بنحو 385.5 مليار دولار، مقابل 1332.7 مليار ريال بنحو368.7 مليار دولار في نوفمبر 2017. وحسب الميزانية الشهرية للبنوك الصادرة عن المصرف المركزي، فقد ارتفعت اصول القطاع المصرفي المحلي خلال نوفمبر الماضي بنسبة 4.5% على أساس سنوي، بينما زادت أصول البنوك العاملة في قطرعلى أساس شهري بنسبة 0.7%، حيث كانت تبلغ في أكتوبر السابق 1384.1 مليار ريال. ودعم الارتفاع الشهري للأصول، زيادة حجم التسهيلات الائتمانية الممنوحة في نوفمبر الماضي بنسبة 0.4% إلى 940.8 مليار ريال، مقابل 937.4 مليار ريال في أكتوبر السابق له.
وبلغت قيمة محفظة الأوراق المالية التي تشمل أدوات الدين 178.2 مليار ريال في نوفمبر، مقابل 176.5 مليار ريال في أكتوبر الماضي، بنمو شهري 0.9%. وارتفع بند الموجودات الأخرى بنسبة 4.5% إلى23.1 مليار ريال، مقارنة بـ22.1 مليار ريال في أكتوبر السابق.
يذكر أن قيمة الاحتياطي النقدي والسيولة لدى مصرف قطر المركزي كانت قد قفزت، خلال أكتوبر الماضي، بنسبة 31.2 % على أساس سنوي، وبلغت قيمة الاحتياطي الأجنبي لقطر بنهاية أكتوبر 2018 نحو 172.48 مليار ريال، مقابل 131.47 مليار ريال بالشهر المناظر من العام الماضي. وعلى أساس شهري، ارتفع الاحتياطي الأجنبي لقطر 1.96 %، علماً أنه كان يبلغ 169.17 مليار ريال في سبتمبر 2018.
ارتفاع الأصول
ووصف الخبير المصرفي سعيد الخيارين ارتفاع أصول القطاع المصرفي المحلي خلال نوفمبر الماضي بنسبة 4.5% على أساس سنوي، حسب الميزانية الشهرية للبنوك بأنه إيجابي، ويدل على قوة الاقتصاد والنمو المتسارع الذي يحققه، حيث أشار المصرف المركزي الى ان إجمالي أصول القطاع المصرفي القطري قد بلغ الشهر الماضي 1393.3 مليار ريال بنحو 385.5 مليار دولار، مقابل 1332.7 مليار ريال بنحو368.7 مليار دولار في نوفمبر 2017، وهذا يعطي مؤشرات قوية باستمرار النمو.
وقال ان الموازنة العامة الجديدة للعام 2019 التي اعتمدها مؤخرا حضرة صاحب السمو الشيخ تميم بن حمد آل ثاني أمير البلاد المفدى مؤشر إيجابي لقطاع البنوك، حيث أكدت معظم الدراسات أن النمو في القطاع المصرفي يتناسب مع حجم الموازنة والأعمال في عام 2019 وسيكون أسرع من النمو في العام الماضي 2018.
وأوضح الخبير المصرفي الخيارين أن زيادة الودائع والأصول وتكرار حركة النمو أمر إيجابي، وقال انه كلما زاد المعروض من الودائع قل التمويل وهو مؤشر إيجابي.
الملاءة المالية
وقال المستثمر ورجل الأعمال راشد حمد العذبة إن ارتفاع أصول القطاع المصرفي المحلي خلال نوفمبر الماضي بنسبة 4.5% على أساس سنوي، وفقا لمصرف قطر المركزي والتي بلغت في مجملها خلال نوفمبر الماضي 1393.3 مليار ريال بنحو 385.5 مليار دولار، مقابل 1332.7 مليار ريال بنحو368.7 مليار دولار في نوفمبر 2017 يؤكد قوة الملاءة المالية للمصارف والبنوك القطرية وقوة الاقتصاد الوطني الذي ظل يحقق معدلات نمو غير مسبوقة. وأضاف ان ذلك يؤكد ايضا استمرار الأداء الايجابي وقدرة البنوك والمصارف على المحافظة على المستوى الإيجابي وزيادة النمو.
وقال ان هذه البيانات تتزامن مع التوقعات الإيجابية لصندوق النقد الدولي بنمو الناتج المحلي بنحو 3.1% في 2019، مقابل توقعاته بنموه بنحو 2.4 % في 2018. وكان الصندوق قد افاد بأن تقديراته تشير إلى أن احتياطيات البلاد من النقد الأجنبي سترتفع إلى 36 مليار دولار، وقال ان ذلك يأتي بفضل الإجراءات المالية الضخمة التي اتخذتها الدولة ومكنتها من مواجهة الصدمات والتحديات المختلفة، وأوضح ان القطاع المصرفي سيستمر في الأداء الايجابي ويحقق نموا في الاصول، في ظل النمو الذي يشهده الاقتصاد، وتستطيع بسهولة مواجهة أي تحديات، نظرا لما تتمتع به من ملاءة مالية قوية تمكنها من مواجهة أي مخاطر. وختم بأن القطاع المصرفي يشكل العمود الفقري للاقتصاد ويدعم خطط التنمية الجارية الآن ورؤية قطر 2030.
نمو متسارع
أكد المحلل المالي طلال السمهوري مدير إدارة الأصول بشركة أموال متانة المصارف والبنوك القطرية وقدرتها على تحقيق نمو متسارع في أصولها خلال السنوات المقبلة. وقال إن البنوك والمصارف القطرية قادرة على المحافظة على أصولها، خاصة مع التحسن المستمر في الأداء والكفاءة التي يتمتع بها القطاع المصرفي في قطر، مشيرا لقوة الاقتصاد القطري والنمو المستارع الذي يحققه، وقال انه يمثل ركيزة أساسية لكافة القطاعات بما فيها القطاع المصرفي، وان النمو المتواصل للاقتصاد سينعكس أثره على القطاع المصرفي، مما يؤدي إلى ارتفاع الأصول والودائع واستمرار النمو في القطاع البنكي بشكل عام، مشيرا للتزايد المستمر والملحوظ في الودائع. وقال انه يتوقع ان يستمر النمو في الأصول البنكية خلال العام الجديد 2019.
 وأكد السمهوري قدرة البنوك على توفير سيولة والوفاء بالمتطلبات المالية للدولة، مع الزيادة المستمرة في المشاريع التنموية واستعداد البلاد لاستضافة المونديال في 2022، وقال إن الترتيبات والتحصينات التي اتخذتها الدولة، خاصة مع بداية الحصار الجائرعلى مستوى التشريعات والهياكل قد ساهمت بشكل فعال في تخفيف تقلبات السيولة وتنويعها في القطاع المصرفي بشكل خاص، كما حسنت سيولة الأصول، فكانت نسبة القروض المتعثرة هي الأقل في القطاع المصرفي في قطر مقارنة بمثيلاتها في دول المنطقة، وأضاف إن التحسن في أداء القطاع المصرفي أسهم كثيرا في تعزيز قدرة المصارف على مواجهة التحديات وامتصاص الصدمات.

Monday, November 26, 2018

"جنرال موتورز" تخفض الموظفين والأجور وتغلق بعض مصانعها.. لماذا؟

نيويورك، الولايات المتحدة ( )-- أعلنت شركة جنرال موتورز عملاق صناعة السيارات الأمريكي، الإثنين، عن خطة إعادة هيكلة ضخمة لأعمالها التجارية العالمية، تتضمن وقف الإنتاج في 5 منشآت في أمريكا الشمالية، وخفض عدد موظفيها، وتقليل الأجور بنسبة 15%، بما في ذلك المديرين التنفيذيين.
وتعتبر هذه الخطوات، هي الأولى من نوعها، على صعيد تحول "جنرال موتورز" منذ قرن من الزمان، حيث تغلق مصانع وتعيد استثمار الأموال بعيداً عن السيارات. وتهدف الشركة إلى التحول إلى السيارات ذاتية القيادة والسيارات الكهربائية.
وقالت الشركة أيضاً إن خطتها ستجعلها أكثر كفاءة، حيث ستوفر لها 6 مليارات دولار سنوياً مع نهاية 2020. وأضافت أن خفض الإنتاج سيسمح بإضافة التكنولوجيا في جميع سياراتها، مما سيقلل من الوقت والجهد.
وذكرت الرئيسة التنفيذية للشركة ماري بارا أن "الإجراءات التي نتخذها اليوم هي أكثر ذكاء، ومرونة، وربحية، وهو ما سيساعدنا للاستثمار في المستقبل، ندرك الحاجة إلى مواجهة ظروف السوق المتغيرة وتفضيلات العملاء، لتحقيق النجاح على المدى الطويل".
وستوقف الشركة العمل في مصانع في ديترويت، وأوشاوا، وأونتاريو، ووارن، وأوهايو، وغيرها.
وتتطلع الشركة لمنافسة مصنعي السيارات، وإنتاج كميات كبيرة من سيارات المستقبل، لكن قادة صناعة السيارات في المستقبل قد لا تكون جنرال موتورز أو أحد منافساتها التقليديين.
وتقود ألفابت، وآبل، وأوبر، وتسلا صناعة السيارات ذاتية القيادة، لهذا اشترت جنرال موتورز شركة "كروز"، وهي شركة مستقلة ومدعومة من سوفت بنك وهوندا.
وتتوقع شركة جنرال موتورز أن تنفق مليار دولار على شركة "كروز" هذا العام، لبناء سيارة المستقبل.
وتعاني "جنرال موتورز" كغيرها من الشركات من ارتفاع التكاليف، بعد فرض تعريفات على الفولاذ والألمنيوم المستورد، والتي رفعت التكاليف بنحو 300 مليون دولار في الربع
جاءت الإمارات وقطر في صدارة الدول العربية والمركز الثاني عالميا في سهولة النظام الضريبي بالنسبة للشركات، بحسب تقرير أصدره البنك الدولي بالتعاون مع برايس ووتر هاوس، الأحد، يقيس الإجراءات التي تمثل عبئاً إدارياً في دفع الضرائب والاشتراكات بالنسبة للشركات والوقت الذي يستغرقه السداد ومعدل الضريبة من الأرباح.

جاءت الإمارات وقطر في صدارة الدول العربية والمركز الثاني عالميا في سهولة النظام الضريبي بالنسبة للشركات، بحسب تقرير أصدره البنك الدولي بالتعاون مع برايس ووتر هاوس، الأحد، يقيس الإجراءات التي تمثل عبئاً إدارياً في دفع الضرائب والاشتراكات بالنسبة للشركات والوقت الذي يستغرقه السداد ومعدل الضريبة من الأرباح.
في 2015، دشنت شركة أرامكو السعودية برنامجا لزيادة نسبة المكون المحلي في صناعتها إلى 70% بحلول 2021، وزيادة الصادرات، وخلق فرص عمل للمواطنين السعودي، من خلال تدريب وتطوير الشباب، وتحسين أداء الموردين، وزيادة قدرات البحث والتطوير، فهل تنجح أرامكو في خطتها؟
قال رئيس مجلس الأعمال السعودي المصري، عبدالله بن محفوظ، إن زيارة ولي العهد السعودي، الأمير محمد بن سلمان، إلى القاهرة ستشهد توقيع عدة اتفاقيات كبيرة منها اتفاقيات بين شركة أرامكو وسابك مع شركات بتروكيماويات مصرية. وأضاف في حديث لـCNN بالعربية، أن قطاعي التعدين والزراعة سيحتلان أولوية بالنسبة للمستثمر السعودي في مصر خلال المرحلة المقبلة.
الثالث، ويقدر أن ترتفع بمليار دولار العام المقبل، فضلا عن مخاوف من ارتفاع تكاليف قطع الغيار، إذا استمرت الإدارة الأمريكية في خططها لفرض جمارك عليها.